अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये

अपनी यादें अपनी बातें लेकर जाना भूल गये;
जाने वाले जल्दी में मिलकर जाना भूल गये;

मुड़-मुड़ कर देखा था जाते वक़्त रास्ते में उन्होंने;
जैसे कुछ जरुरी था, जो वो हमें बताना भूल गये;

वक़्त-ए-रुखसत भी रो रहा था हमारी बेबसी पर;
उनके आंसू तो वहीं रह गये, वो बाहर ही आना भूल गये।

दौर कागजी था

दौर कागजी था,
देर तक खतों में मोहब्बत ज़िंदा रहती थी..

मशीनी दौर में उंगली से मिटा दी जातीं हैं, उम्र भर की यादें!

हूं अगर खामोश तो ये न समझ

हूं अगर खामोश तो ये न समझ
कि मुझे बोलना नहीं आता,

रुला तो मैं भी सकता था
पर मुझे किसी का दिल तोड़ना नहीं!

दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं

दिल में है जो दर्द वो दर्द किसे बताएं,
हंसते हुए ये ज़ख्म किसे दिखाएँ,
कहती है ये दुनिया हमे खुश नसीब,
मगर इस नसीब की दास्ताँ किसे बताएं!

सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब

सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब,
नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे।

एक अजीब सी जंग छिड़ी है तेरी यादों को लेकर,
आँखे कहती हैं सोने दे… दिल कहता है रोने दे….

अपनी बाहो में मुझे बिखर जाने दो

अपनी बाहो में मुझे बिखर जाने दो!

सांसों से अपनी मुझे बहक जाने दो,

दिल बेचैन है कब से इस प्यार के लिए!

आज तो सीने में अपने मुझे उतर जाने दो…!!!

कभी सागर, कभी झील, तो कभी जाम रखा है,

कभी सागर, कभी झील, तो कभी जाम रखा है,

इश्क करने वालो ने भी आँखों का ना जाने क्या क्या नाम रखा है!

ज़रूरी नहीं है ….इश्क में ……बांहों के सहारे ही मिले,

ज़रूरी नहीं है ….इश्क में ……बांहों के सहारे ही मिले,

किसी को जी भर के ….महसूस करना भी मोहब्बत है!